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Thursday, 18 February 2016

संघी फासीवादियों के बढ़ते जनवाद विरोधी कदमों के विरोध में आगे आओ

संघी फासीवादियों के बढ़ते जनवाद विरोधी कदमों   के विरोध में आगे आओ 
      संघी फासीवादी अब फिर आक्रामक होने लगे हैं वह गुंडागर्दी की एक से बढ़ाकर एक मिसालें कायम कर रहे हैं समाज में मज़दूर मेहनतकश अवाम व जनवाद के पक्ष में अन्याय के विरोध में आवाज उठाने वाली ताकतों पर वह दहशत कायम कर देना चाहते हैं। मद्रास में पेरियार स्टडी ग्रुप फिर हैदराबाद में अम्बेडकर स्टूडेंट एसोसिएसन  अब ख्याति प्राप्त जे एन यू कालेज में छात्र संघ पर हमला।
           पिछले कुछ महीनों से भाजपा समर्थक पूंजीवादी प्रचार माध्यम लगातार प्रचार कर रहे थे कि जे एन यू देशद्रोहियों का अड्डा बना हुआ है। उनका निशाना खास तौर पर वामपंथी छात्र संगठन बने हुए थे जिनमें से तीन एस एफ आई, ए आई एस एफ और आइसा क्रमशः माकपा, भाकपा ओर भाकपा (माले) लिबरेशन से जुड़े हुए हैं। इनके अलावा कुछ क्रांतिकारी छात्र संगठन भी हैं। छात्र संघ में एक लम्बे समय से उपरोक्त तीन छात्र संगठनों का ही कब्जा रहा है। हालांकि ये तीनों सरकारी वामपंथी पाट्रियों से जुड़े व्यवस्था परस्त छात्र संगठन हैं तब भी सत्ता के नशे में चूर संघियों को इनका भी वामपंथ बर्दाश्त नहीं हो रहा है। खासकर इनकी साम्प्रदायिकता विरोधी गतिविधियां हिन्दू साम्प्रदायिक संघियों को बहुत परेशान करती हैं। इसी लिए संघ ने इस पर हमला किया।  बहाना लिया देश विरोधी नारे लगाने के--- अफजल की फांसी के विरोध में नारेबाजी का , पाकिस्तान ज़िन्दाबाद कहने का   कश्मीर की आज़ादी के नारे का आदि।
        कुलमिलाकर  थीएम सब जगह एक ही है।  देशभक्ति का लाइसेंस  का ठेका अम्बानी अडानी टाटा जैसों ने संघ भाजपा व ए  बी वी पी को सत्ता पर बिठाकर दे दिया है।
              जो लोग भी फासीवादी संघ के देश भक्ति के सांचे में नहीं ढलते  उसे देश द्रोह घोषित कर दिया जाता है। ब्रिटिश शासकों के तलवे चाटने वाला संघ परिवार आज ओबामा, शिंजो अबे व ओलांद के चरणों में लोट पॉट हो रहा है। यही उसकी देश भक्ति है एक तरफ है अम्बानी अडानी  टाटा एस्सार मित्तल जैसोन की चरण बंदना तो दूसरी तरफ ओबामा से लेकर ओलांद तक , फेहरिस्त लम्बी है।  यही इनका बंन्दे मातरम हैं।  यही इनका जय हिन्द है।
     अब इनके घृणित हौसले इस कदर बढ़ चुके हैं क़ि ये न्यायालय परिसर के भीतर हमला करते हैं।  गोली मार देने तक की बात करते हैं , लगातार  हमला दर हमला कर रहे हैं।  न्यायालय की अवमानना करते हुए न्याय के मत्स्य सिद्धांत को लागू करना फासिस्टों की फितरत है। संघी चाहते हैं कि उनका छात्र संगठन ए बी वी पी हर शिक्षा परिसर में काबिज हो जाये। वे  सत्ता का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि वे इसके जरिये अपने हिन्दू राष्ट्र के लक्ष्य की ओर बढ़ सकते हैं।
              इस घटना ने एक हद तक संघ के  राष्ट्रवाद को काफी हद तक बेनकाब किया है।  संघ के दोगले चरित्र को बेनकाब किया है।  जे एन यु में अफजल के समर्थन में नारे लगाने वाले  के लिए देश द्रोही है तो दूसरी ओर  कश्मीर में अफजल गुरु को शहीद  बताने वाली पी डी  पी   के साथ सरकार बना चुकी है यह संघ परिवार के लिए राज्य के सन्दर्भ में किया गया प्रैग्मेटिक फैसला है , आत्मसात किये जाने का मामला है।  वाह !! क्या अवसरवादी फासीवादी तर्क है।  फासीवादी संघ घोर अवसरवादी है यह भी साबित हो गया।
      

रोहित वेमूला की आत्महत्या के लिए जिम्मेवार लोगों को सजा दो

रोहित वेमूला की आत्महत्या के लिए जिम्मेवार लोगों को सजा  दो 


    हैदराबाद विश्वविद्यालय के एक छात्र रोहित वेमूला साम्प्रदायिक फासीवादी ताकतों एवं मानव संसाधन मंत्रालय के दबाव में  आत्महत्या करने को मजबूर होना पड़ा। दरअसल यह आत्महत्या नहीं बल्कि फ़ासीवादी ताकतों द्वारा पैदा की गयी परिस्थितियों का नतीजा थी।  स्पष्टत  यह संघी ताकतों द्वारा की जाने वाली ह्त्या थी।  
    अम्बेडकर स्टूडेंट एसोसिएसन के बैनर तले छात्त्रों ने   संघी ताकतों पर सवाल खड़े किये ।   मुजफ्फरनगर २०१३ के दंगों पर बनी फिल्म 'मुजफ्फरनगर अभी बाकी है' फिल्म के समर्थन में ये छात्र आवाज  उठा रहे थे।  इस फिल्म के प्रदर्शन में संघीय गुंड़ा वाहिनी ने तमाम जगहों पर उपद्रव किया था।  यही नहीं ये छात्र आतंकवाद के नाम पर मुसलमानों को फ़साने व उन्हें फ़ांसी देने पर सवाल खड़े कर रहे थे।  
   यही वो वजह थी जन्हा संघी छात्र संगठन ने उन्हें देश द्रोही के रूप में दुष्प्रचारित  किया।  मारपीट की 
फर्जी ऍफ़ आई आर भी कराई गयी।  बात न बनने पर  अपनी  सरकार की मदद से मानव संसाधन मंत्रालय के जरिये इन छात्रों को कॉलेज से निलंबित करवा दिया गया।  इस निलंबन के विरोध में छात्र लम्बे समय से धरने पर बैठे थे।  देशद्रोही निरंतर दुष्प्रचार तथा मांगों के अनसुनी होने की स्थिति में  रोहित को आत्महत्या का कदम उठाना पड़ा।  
       दरअसल फासीवादी संघ अपने एक देश एक भाषा एक संस्कृति को पूरे देश पर थोप देना चाहता है और वह लगातार इसके लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहा है।  रहन सहन , खान पान , आदिन के नाम पर वह अपने घृणित एजंडे को लगातार आगे बढ़ा रहा है।  आज देश में हर किस्म की असहमति को देश द्रोह साबित करने की कोशिशें संघी ताकतें कर रही हैं। जनवादी चेतना व जनवादी अधिकारों पर वह लगातार हर मुद्दे के जरिये हमला कर रहे हैं।   
    सही मायने में संघी फासीवादी ताकतों व कॉर्पोरेट घरानों का घृणित गठजोड़ आज भारत को लगातार उस दिशा में धकेल रहा है जहां पूंजीवादी  जनवाद का सीमित दायरा  भी  ख़त्म हो जाये  . नंगी तानाशाही स्थापित हो जाए। नए अार्थिक सुधारों को तेजी से आगे बढ़ाने व  मेहनतकश जनता के अपने शोषण उत्पीड़न व अन्याय  के विरोध में उठती आवाज को इसी ढंग से नियत्रिंत किये जाने की जरूरत के चलते ही यह घृणित गठजोड़ कायम हुआ है।  
    अब वक्त है संघी ताकतों के हर कदम का जवाब दिया जाय व पूूंजीवाद के विरोध में संघर्ष विकसित किया जाय।