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Friday, 3 February 2017

देशी विदेशी पूंजी के हितों को साधता बजट

देशी विदेशी पूंजी के हितों को साधता बजट

  2017-18 का बजट घोषित हो गया। 16 मई 2014 के दिन से यह तय हो गया था कि जिन नवउदारवादी नीतियों के घोड़े की लगाम पहले कांग्रेस के पास थी अब वह फासीवादी ताकतों के हाथ में थी इसे तेज भागना ही था।
    इसलिए बजट भी उसी तरह का बनना था। 2015 के बजट में ही यह साफ़ ही चुका था। तब सामाजिक कल्याणकारी मदों में दी जाने वाली राशि में बड़ी कटौती की गयी थी। ग़रीब मेहनतकश अवाम के पक्ष में खर्च होने वाली सब्सिडी को और कम कर दिया गया था।
    इसके उलट देशी विदेशी पूंजी को तमाम सहूलियते-छूटें दी गयी । कर में लाखों करोड़ की छूट, कॉर्पोरेट व संपत्ति कर से राहत आदि।
    2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी के बाद से ही साम्राज्यवादी मुल्कों विशेषकर अमेरिका का ये दबाव और बढ़ा है कि राजकोषीय घाटे को लगातार कम किया जाय, सामाजिक मद में खर्च होने वाले बजट को लगातार कम  किया जाय, सब्सीडी (गरीबों) को ख़त्म किया जाय, पूंजी को लूट के रास्ते को और सुगम बनाया जाय। विनिवेशीकरण नये आर्थिक सुधारों के दौर का ही नारा है।
     यही मूल मंत्र बजट में दिखता है राजकोषीय घाटे को 3.2 % पर लाने के लिए सरकार खुद तो देशी विदेशी पूंजी उनकी तारीफ कर रही है यही हाल नोटबंदी के बाद होने वाले नुकसान के बावजूद सामाजिक मदो  व सब्सिडी में कटौती जारी है। यही नहीं सार्वजनिक उपक्रमों के विनिवेश(निजीकरण) के जरिये 72500 करोड़ रूपये उगाहने का लक्ष्य सरकार ने लिया है।
     सार्वजनिक मद स्वास्थ्य, शिक्षा , परिवहन, महिला बाल कल्याण विकास आदि के लिये क्या किया गया कितना बजट दिया गया । इन सभी में बजट के आकार  व मुद्रा स्फीति के अनुपात में गिरावट जारी है।
     वैश्विक मानव विकास सूचकांक में बेहद ख़राब स्थिति के बावजूद संघी मोदी सरकार का इन मदो में कटौती करना उसकी नग्न पूंजीपरस्ती व गरीब अवाम के प्रति घोर संवेदनहीनता को ही दिखाता है।
    2012 में निर्भया कांड के बाद महिला सुरक्षा के लिए पिछले साल जारी "निर्भया फंड" बजट  585 करोड़ को कम करके 400 करोड़ कर दिया गया है।
      मनरेगा में पिछले साल के कुल 47400 करोड़ को बढाकर 48000 करोड़ मात्र किया गया मात्र 1.2 % की बढ़ोत्तरी !! किसानों को कितने के कर्ज माफी से राहत दी गयी ?  राहत तो दूर उल्टा उन्हें सांस्थानिक कर्ज जाल में फ़साने के लिए भारी भरकम राशि कर्ज के लिए उपलब्ध है। 

     इसके उलट पूंजीपतियों के लिए कॉर्पोरेट टैक्स में 5 % की छूट के अलावा उन्हें प्रत्यक्ष व परोक्ष फायदा देने को तमाम बातें बजट में हैं । 2015 में ही संघी मोदी सरकार पूंजीपतियों को 6 लाख करोड़ रूपये टेक्स में छूट दे चुकी थी ।