Tuesday, 23 August 2022

बिल्किस बानो की बलात्कारियों की रिहाई के विरोध में


     बिल्किस बानो के बलात्कारियों और उसके परिवार के 7 लोगों समेत 3 साल की मासूम बच्ची का कत्ल कर देने के अपराध में 11 लोगों को आजीवन की कारावास की सजा हुई थी।
        मगर ठीक 15 अगस्त 2022 को जब लालकिले से प्रधानमंत्री मोदी तमाम दावे कर रहे थे और आजादी के अमृत महोत्सव का जिक्र कर रहे थे ठीक उसी दिन बिल्किस बानो के अपराधियों को गुजरात सरकार द्वारा माफीनामा देकर रिहा कर दिया गया। जिस कमेटी ने इन अपराधियों की रिहाई की संस्तुति दी उसमें भाजपा से जुड़े 5 लोग थे। 
      मामला यहीं तक सीमित नहीं रहा अपराधियों को जिन पर जघन्य हत्या और बलात्कार के मुकदमे दर्ज थे उन्हें मिठाई खिलाई गयी और इनका फूल मालाओं से स्वागत किया गया।
          मोदी और मोदी सरकार ने इस रिहाई के खिलाफ एक शब्द बजी अभी तक नहीं बोला है। इसका अर्थ साफ है कि यह सब ऊपर के इशारे पर हुआ है।
        इस तरह अब खुलेआम एक बलात्कारियों और हत्यारे लोगों के पक्ष में भाजपा दृढ़तापूर्वक खड़ी हुई है। भाजपा, गुजरात सरकार और मोदी तथा इनकी केंद्र सरकार ने एक धर्मविशेष के खिलाफ अपराध करने को प्रोत्साहित किया है। साथ ही साथ महिलाओं की स्थिति को, उनके संघर्षों करने के साहस को, अपने अपराधियों को चुनौती देने और दंडित करवाने की चाहत को कमजोर किया है।
         मामला एक तरह से केवल एक धर्म विशेष तक सीमित नहीं रहेगा। यह ध्रुवीकरण की  फासीवादी राजनीति को आगे बढ़ाने का घटिया प्रयास है। यह एक तरह से भाजपा और संघी लम्पट तत्वों को किसी भी आम महिला के साथ हिंसा और अपराध करने को उत्साहित करने और बढ़ावा देने वाला कृत्य है। इसलिये जरूरी है कि इसके खिलाफ संघर्ष किया जाय। तथा एकजुट होकर रिहा किये गए बलात्कारियों और हत्यारे तत्वों की रिहाई को रद्द करने और इन्हें दंडित किये जाने के एकजुट होकर आवाज बुलंद की जय।
    




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