23 मार्च शहादत दिवस के अवसर पर
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पूंजीवाद-साम्राज्यवाद के खिलाफ युद्ध अभी जारी है
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‘‘निकट भविष्य में अंतिम युद्ध लड़ा जायेगा और यह युद्ध निर्णायक होगा। साम्राज्यवाद और पूंजीवाद कुछ दिनों के मेहमान हैं। यही वह लड़ाई है जिसमें हमने प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया है और हम अपने पर गर्व करते हैं कि इस युद्ध को न तो हमने प्रारंभ किया है और न यह हमारे जीवन के साथ समाप्त होगा।’’ (‘हमें फांसी के बजाय गोली से उड़ा दिया जाये’ शीर्षक से पंजाब के गर्वनर को लिखे पत्र से)
यह शब्द शहीदे आजम भगत सिंह के हैं। 23 मार्च, 1931 को जालिम अंग्रेज साम्राज्यवादियों ने भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू को फांसी के फंदे पर चढ़ा दिया था। अंग्रेज शासकों ने सोचा कि उनकी मौत के साथ यह युद्ध वह जीत जायेंगे लेकिन शोषण-उत्पीड़न-असमानता के खिलाफ यह युद्ध आज भी जारी है। इस युद्ध में एक तरफ पूंजीवादी-साम्राज्यवादी शासक हैं तो दूसरी तरफ मजदूर-मेहनतकश-छात्र-नौजवान हैं। शहीदे आजम भगत सिंह मजदूरों-मेहनतकशों के योद्धा के बतौर इस युद्ध में शहीद हुए।
फांसी पर चढ़ने से पहले भगत सिंह महान रूसी क्रांतिकारी लेनिन की जीवनी पढ़ रहे थे। फांसी से पहले जब उनसे उनकी आखिरी इच्छा पूछी गयी तो उन्होंने कहा कि उन्हें लेनिन की जीवनी पूरी करने का समय दिया जाये। लेनिन उस रूसी क्रांति के नेता थे जिस क्रांति ने दुनिया में पहली बार मजदूरों-किसानों की सत्ता की स्थापना की। रूसी क्रांति ने जारीशाही शासन का समाप्त कर समाजवाद की स्थापना की तथा मानव द्वारा मानव के शोषण का खात्मा किया। यह वर्ष महान अक्टूबर समाजवादी क्रांति (1917) का सौंवा वर्ष है।
रूस की समाजवादी क्रांति ने न सिर्फ पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा बल्कि 20 वीं सदी के इतिहास की पूरी दिशा ही बदल दी। इस क्रांति ने गुलामी, शोषण, असमानता और साम्राज्यवाद से लोहा लेने वाली ताकतों को नयी ऊर्जा व नयी राह प्रदान की। समाजवादी क्रांति ने दुनिया के शोषित-उत्पीड़ितों को बताया कि पूंजीवादी लोकतंत्र नहीं बल्कि समाजवादी लोकतंत्र ही उनकी मुक्ति का मार्ग है। रूसी समाजवादी क्रांति ने यह साबित कर दिया कि पूंजीवाद-साम्राज्यवाद का विकल्प समाजवाद है, कि दुनिया को अब परजीवी शासकों की जरूरत नही है बल्कि मजदूर-मेहनतकश स्वंय अपना शासन चला सकते हैं और उनसे बेहतर चला सकते हैं। कि भविष्य समाजवाद का है। दुनिया के कोने-कोने में समाजवाद के लिए संघर्ष करने वालों में भगत सिंह भी एक हैं।
भगत सिंह ऐसे युवा थे जो जोश और उमंग के साथ-साथ अपनी वैचारिक परिपक्वता के लिए जाने जाते हैं। भगत सिंह देश के नौजवानों को, वे चाहे मजदूर हों, छात्र हों या फिर बेरोजगार को ऊर्जा से भर देने वाले शख्स हैं। उनका पूरा जीवन बात का गवाह रहा है। युवाओं की उर्जा, उत्साह क्या होता है और अन्याय के खिलाफ अनवरत संघर्ष कैसे किया जाता है यह भगत सिंह से सीखा जा सकता है। पूंजीवादी-साम्राज्यवादी लूट-शोषण के खिलाफ संघर्ष भगत सिंह के संघर्ष का एक हिस्सा था तो मजदूरों-किसानों का राज समाजवाद की स्थापना करना दूसरा हिस्सा था। आज भी दुनिया और देश पूंजीवाद-साम्राज्यवाद से मुक्त नहीं है। मजदूरों-किसानों-छात्र-नौजवानों को जीवन कष्टमय बना हुआ है।
दुनिया में छाया आर्थिक संकट मजदूरों-मेहनतकशों के जीवन और कष्टों से भर रहा है। शासक वर्ग रही-सही राहत भी मजदूरों-मेहनतकशों से छीन लेने पर आमादा है। पूरी ही दुनिया में शासक वर्ग दक्षिणपंथ की ओर ढुलकता जा रहा है। पूंजीवादी लोकतंत्र को और सीमित करते हुए वे मेहनतकशों पर हमलावर है। पूंजी की लूट, मुनाफे को बढ़ाने के लिए तथा मजदूर-मेहनतकशों को और निचोड़ने के लिए वे हर संभव कोशिश कर रहे हैं।
भारत में भी संघी सरकार मजदूरों-मेहनतकशों पर हमले के नये कीर्तिमान रच रही है। श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी बदलाव, मजदूरों के शोषण के लिए विदेशी निवेश को आतुर यह सरकार पूर्व की सरकारों को भी पीछे छोड़ दे रही है।आर्थिक हमलों के साथ-साथ संघी सरकार अपने फासीवादी एजेण्डे को लगातार आगे बढ़ा रही है और अपने विरोध में उठने वाली हर आवाज को निर्ममता से कुचल रही है। विरोध के स्वर से निपटने में वह लंपटाई में उतर आयी है। कालेज-कैंपस संघी गुण्डागर्दी के अड्डे बनते जा रहे हैं।
ऐसे समय में भगत सिंह व उनके विचार और भी महत्व ग्रहण कर लेते हैं। ऐसे समय में महान अक्टूबर समाजवादी क्रांति और भी प्रासंगिक हो जाती है। चहुंओर पूंजीवाद-साम्राज्यवाद से पीड़ित जन की मुक्ति का मार्ग समाजवादी क्रांति से होकर जाता है। भगत सिंह ऐसे राष्ट्रवादी क्रांतिकारी थे जो भारत को अंग्रेजों से मुक्त कराने के साथ-साथ शोषण और सभी तरह की असमानता से मुक्ति दिलाने के लिए संघर्षरत थे। जिसमें उन्होंने अपने प्राणों का बलिदान दिया।
भगत सिंह ने कहा था-‘‘ हम वर्तमान ढांचे के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्रों में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने के पक्ष में हैं। हम वर्तमान समाज को पूरे तौर पर एक नये सुगठित समाज में बदलना चाहते हैं। इस तरह मनुष्य के हाथों मनुष्य का शोषण असंभव बनाकर सभी के लिए सब क्षेत्रों में पूरी स्वतंत्रता विश्वसनीय बनायी जाये। जब तक सारा सामाजिक ढांचा बदला नहीं जाता और उसके स्थान पर समाजवादी समाज स्थापित नहीं होता, हम महसूस करते हैं कि सारी दुनिया एक तबाह कर देने वाले प्रलय संकट में है।’’ (‘अदालत एक ढकोसला है’ से कमिश्नर विशेष ट्रिब्यूनल लाहौर साजिश केस के सामने स्पष्टीकरण)
आज के इस कठिन दौर में भगत द्वारा बताया गया समाजवाद का रास्ता ही मजदूरों-किसानांं-छात्रों-नौजवानों-महिलाओं के जीवन में बेहतरी का रास्ता है। पूंजीवाद-साम्राज्यवाद अपने पतन में इस कदर डूब चुके हैं कि वे मानवजाति पर एक त्रासदी बन गये हैं। मजदूरों-मेहनतकशों को, छात्रों-युवाओं-महिलाओं को क्रांति और समाजवाद के परचम को लेकर अपनी मंजिल तक पहुंचाना होगा जिसे शहीदे आजम भगत सिंह ने एक समय बुलंद किया था।
अक्टूबर क्रांति के सौवें वर्ष पर तथा शहीदे आजम भगत सिंह के शहादत दिवस पर हम मजदूरों-मेहनतकशों, छात्रों-नौजवानों, महिलाओं का आहवान करते हैं कि मुक्ति के संघर्ष को आगे बढ़ायें।