Saturday, 19 July 2014

Against invasion of Gaza

             बेगुनाह फिलीस्तीनी जनता का कत्ले आम बंद करो

      इजरायली शासकों ने हमास की आड़ में गाज़ा पट्टी इलाके में रह रही  फिलिस्तीनी जनता पर हमला बोल  दिया हैं इस हमले में मासूम बच्चे भी मारे जा रहे हैं । इजरायली शासकों की यह करतूत बेहद घृणित है । इजरायली शासक वर्ग एक ओर बाहर फिलीस्तीनी जनता का तो दूसरी ओर देश के भीतर मेहनतकश जनता का दमन कर  रहा है ।
      प्रथम व द्वितीय विश्व युद्ध के दौर में अलग अलग मुल्कों में उत्पीड़ित व दबी कुचली गई यहूदी आबादी को फिलीस्तीन के एक हिस्से में बसाकर इजरायली राष्ट्र के रूप में मानयता दी गई । इस हिस्से में कुछ यहूदी आबादी पहले से रह रही थी । इस कौम के प्रति तब सहानुभूति की लहर थी । सभी प्रगतिशील, जनवादी व समाजवादी ताकतों ने इसका राष्ट्र के रूप में इसका  समर्थन किया  था ।
       लेकिन एक राष्ट्र के रूप में वजूद में आते ही यह अमेरिकी साम्राज्यवादी शासकों  द्वारा दी गई आर्थिक  व सैन्य सहायता के दम पर उत्पीड़क राष्ट्र बन गया । इसने धीरे धीरे पूरे ही फिलीस्तीन को हड़प जाने की ओर कदम बढ़ाए । फिलीस्तीनी जनता को पड़ोसी मुल्कों में भाग शरण लेने के लिए विवश कर दिया गया जबकि फिलिस्तीन  के गाज़ा व वेस्ट बैंक इलाके में इनकी स्थिति शरणार्थियों की तरह हो गई ।
      इस उत्पीड़न , अपमान व अत्याचार के खिलाफ फिलीस्तीनी मुक्ति संगठन ( पी एल ओ ) ने जुझारू संघर्ष किए । पी एल ओ  फिलीस्तीनी राष्ट्र के संघर्ष को आगे बढ़ा रहा था।  फिलीस्तीनी जनता ने इंतिफादा  के रूप में जबर्दस्त जुझारू संघर्ष किया कुर्बानी की मिसाल कायम की । पूरी दुनिया की जनता का ध्यान इस संघर्ष ने अपनी ओर खींचा ।
      लेकिन धूर्त इजरायली शासकों ने हमास जैसे आतंकी संगठन को खड़ा करके पी एल ओ  को खत्म करने की कुटिल योजना पर अमल किया । और पी एल ओ को कमजोर कर दिया । और यासिर अराफ़ात के नेतृत्व में चल रहा संघर्ष  फिलीस्तीनी राष्ट्र की मांग से पीछे हटते हुए एक  बेहद सीमित अधिकार वाली स्वायत्त फिलीस्तीनी औथोरीटी तक पहुँच गया ।
      इजरायली शासक इसके लिए भी तैयार नही वह जब तब इस क्षेत्र में  रह रही फिलीस्तीनी जनता पर अत्याधुनिक हथियारों से हमले कर हत्याएँ करता रहता  है । इजरायल द्वारा एक दौर में पैदा किया गया हमास आज उसी के खिलाफ चला गया है । इसके द्वारा किए जाने वाले हमलों की आड़ में इजरायली शासक निर्दोष फिलीस्तीनी जनता की हत्याएँ करते हैं।
      अमेरिकी साम्राज्यवादी इस वक्त अपने  केवल इजरायल की निंदा तक रोके हुए हैं  जैसा कि वह पहले से ही करते हुए आ रहे हैं । इजरायल पश्चिमी एशिया में अमेरिका के लठैत के रूप में में है । यह साम्राज्यवादी अमेरिका के लिए भूराजनीतिक महत्व रखता है ।
       इजरायली शासकों की इस घृणित कार्रवाई पर भारतीय शासक भी खामोश है । धुर दक्षिणपंथी सरकार इस पर चर्चा करने को भी तैयार  नहीं । भारतीय शासकों की यह खामोशी वाला रुख पिछले लंबे वक्त से है । एक दौर में फिलीस्तीनी जनता के मुक्ति संघर्ष का समर्थन करने वाला भारतीय शासक वर्ग इजरायल की ही तरह भूमिका अमेरिकी शासकों के लिए निभाने के लिए उत्सुक है ।
      वर्तमान में गाज़ा में रह रही फिलीस्तीनी जनता का कत्लेआम इसी की कड़ी है । दुनिया भर की  मजदूर मेहनतकश जनता , प्रगतिशील व जनवादी ताकतों को इजरायली शासकों की इस घृणित हमले की निंदा करते हुए उस पर इस हमले को तत्काल रोके जाने का दबाव बनाना चाहिए ।
       
     

     

        
         
       
     

       

Devastated Iraq

                                तबाह बर्बाद इराक  
      अमेरीकी साम्राज्यावाद द्वारा तबाह बर्बाद किए गए मुल्कों की कतार लंबी है । पिछले दो ढाई दशक से इराक जैसे मुल्क को अमेरीकी शासको ने ऐसे मुकाम पर पहुंचा दिया है जहां इसके तीन हिस्से में  बंटने की संभावना बन गई है । “ जनतंत्र” के नाम पर, रासायनिक हथियारों के नाम पर व आतंकवाद  के नाम पर दुनिया का सबसे बड़ा प्रतिक्रियावादी मुल्क अमेरिका दूसरे मुल्कों में हस्तक्षेप करता रहा है ।
      अमेरिकी शासकों द्वारा खड़ा किया गया आई एस आई एस जैसा कट्टरपंथी सुन्नी संगठन आज  कितनी मजबूती हासिल कर चुका है यह हाल की घटनाओं से समझा जा सकता है । एक वक्त में तालीबान को जिस तरह से अमेरिकी शासकों ने खड़ा किया था और फिर कट्टरपंथी तालीबानी अमेरिकी शासको के लिए ही अफगानिस्तान  में बाधा बन गए । यही स्थिति यहाँ भी बन गई है ।
      सीरिया के खिलाफ आई एस आई एस को खड़ा किया गया था । लेकिन सीरिया की बसर अल असद सरकार द्वारा इस कट्टरपंथी संगठन को पीछे धकेल दिया गया । इस वक्त अमेरिकी शासकों ने आई  एस आई एस को हथियार आदि हर तरह  से मदद की । सीरिया में सफल ना होने के बाद कट्टरपंथी संगठन  ने इराक की ओर रुख किया । अमेरिकी शासकों की चिंता है की कहीं सुन्नी कट्टरपंथी तेल व गैस क्षेत्रों पर ही कब्जा ना करा लें ।
      इराक में शिया , सुन्नी व कुर्द संप्रदाय के लोग रहते हैं । इराक का इन तीनों सम्प्रदायों के आधार पर पर विभाजन अमेरिकी शासकों की घृणित योजना थी । साम्प्रदायिक विभाजन का बीच अमेरिकी शासकों द्वारा बोया गया था । कुर्द अलग कुर्द राष्ट्र के लिए संघर्षरत हैं । इस कुर्द राष्ट्र में तुर्की ,सीरिया व ईरान के कुर्द इलाके भी शामिल हैं लेकिन  यहाँ के शासकों द्वारा कुर्दों का दमन किया जाता रहा है ।
      इराक की मालिकी सरकार अमेरिकी शासकों व ईरान की मदद से चल रही थी । यह सरकार शिया संप्रदाय वाली है इसने भी सांप्रदायिकता को और ज्यादा बढ़ाया । अमेरिकी शासक अपने हितों पर आंच आता देख  फिर से   अधिक हस्तक्षेप की भूमिका में आ रहा है ।
      कुलमिलाकर इराक की पिछले दो दशकों में मारे गए लाखों लोगों तथा  इराक को तबाह बर्बाद कर देने के  जिम्मेदार अमेरिकी शासक हैं ।

      

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