तबाह बर्बाद इराक
अमेरीकी
साम्राज्यावाद द्वारा तबाह बर्बाद किए गए मुल्कों की कतार लंबी है । पिछले दो ढाई
दशक से इराक जैसे मुल्क को अमेरीकी शासको ने ऐसे मुकाम पर पहुंचा दिया है जहां
इसके तीन हिस्से में बंटने की संभावना बन
गई है । “ जनतंत्र” के नाम पर, रासायनिक हथियारों के नाम पर व आतंकवाद
के नाम पर दुनिया का सबसे बड़ा प्रतिक्रियावादी मुल्क अमेरिका दूसरे मुल्कों में हस्तक्षेप करता रहा है ।
अमेरिकी
शासकों द्वारा खड़ा किया गया आई एस आई एस जैसा कट्टरपंथी सुन्नी संगठन आज कितनी मजबूती हासिल कर चुका है यह हाल की घटनाओं
से समझा जा सकता है । एक वक्त में तालीबान को जिस तरह से अमेरिकी शासकों ने खड़ा
किया था और फिर कट्टरपंथी तालीबानी अमेरिकी शासको के लिए ही अफगानिस्तान में बाधा बन गए । यही स्थिति यहाँ भी बन गई है
।
सीरिया
के खिलाफ आई एस आई एस को खड़ा किया गया था । लेकिन सीरिया की बसर अल असद सरकार
द्वारा इस कट्टरपंथी संगठन को पीछे धकेल दिया गया । इस वक्त अमेरिकी शासकों ने
आई एस आई एस को हथियार आदि हर तरह से मदद की । सीरिया में सफल ना होने के बाद
कट्टरपंथी संगठन ने इराक की ओर रुख किया ।
अमेरिकी शासकों की चिंता है की कहीं सुन्नी कट्टरपंथी तेल व गैस क्षेत्रों पर ही
कब्जा ना करा लें ।
इराक
में शिया , सुन्नी व
कुर्द संप्रदाय के लोग रहते हैं । इराक का इन तीनों सम्प्रदायों के आधार पर पर
विभाजन अमेरिकी शासकों की घृणित योजना थी । साम्प्रदायिक विभाजन का बीच अमेरिकी
शासकों द्वारा बोया गया था । कुर्द अलग कुर्द राष्ट्र के लिए संघर्षरत हैं । इस
कुर्द राष्ट्र में तुर्की ,सीरिया व ईरान के कुर्द इलाके भी
शामिल हैं लेकिन यहाँ के शासकों द्वारा
कुर्दों का दमन किया जाता रहा है ।
इराक की
मालिकी सरकार अमेरिकी शासकों व ईरान की मदद से चल रही थी । यह सरकार शिया संप्रदाय
वाली है इसने भी सांप्रदायिकता को और ज्यादा बढ़ाया । अमेरिकी शासक अपने हितों पर
आंच आता देख फिर से अधिक हस्तक्षेप की भूमिका में आ रहा है ।
कुलमिलाकर
इराक की पिछले दो दशकों में मारे गए लाखों लोगों तथा इराक को तबाह बर्बाद कर देने के जिम्मेदार अमेरिकी शासक हैं ।
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