सम्मेलन के बाद सभा व जुलूस प्रदर्शन
करने पर लगे फ़र्जी मुकदमों के विरोध में प्रैस कॉन्फ़ेरेन्स व सचिवालय कूच 14-15 अक्टूबर को हरिद्वार के
बी.एच.ई.एल. सभागार में इन्कलाबी मज़दूर केन्द्र द्वारा अपने तीसरे सम्मेलन का
आयोजन किया जा रहा था।इस सम्मेलन में हरिद्वार पुलिस प्रशासन द्वारा दखलअन्दाजी
कर व्यवधान पैदा किया गया। सिड्कुल एसोसिएसन के इशारे पर काम करने वाली उत्तराखण्ड
सरकार व हरिद्वार पुलिस प्रशासन जब सम्मेलन को रोकने में कामयाब ना हो सका तो उसने
15 अक्टूबर को सम्मेलन के बाद
होने वाले खुले सत्र की कार्यवाही को न होने देने की ठान ली लेकिन उसे जब यह अहसास
हुआ कि वह खुले सत्र की कार्यवाही को नही रोक सकता तो उसने इस कार्यक्रम को बगैर
टैन्ट के करने व जुलूस निकालने की मूक सहमति दी खुद पुलिस प्रशासन जुलूस के
आगे-आगे रहा । कार्यक्रम समाप्त होने तक पुलिस साथ रही सब कुछ शान्तिपूर्ण तरीके
से हुआ। लेकिन दूसरी ओर साजिशें भी चलती रही। 17 अक्टूबर को हिन्दी दैनिक अखबारों के
माध्यम से ही इस साजिश का पता लगा वह यह कि15 अक्टूबर की शाम को 5 बजे लगभग 32 नामजद पर व 150 गैर नामजद लोगों पर 7 क्रिमीनल एक्ट, 341,147,447 व 505 की संगीन धाराओं के तहत फ़र्ज़ी
मुकदमे दर्ज़ कर दिये गये है।
उत्तराखण्ड सरकार की इस संवैधानिक व जनवादी अधिकारों पर हमले की इस
कार्यवाही के विरोध में 23 अक्टूबर को देहरादून में प्रैस
कॉनफ़ेरेन्स का आयोजन क्रान्तिकारी लोक अधिकार संगठन,इन्कलाबी मजदूर केन्द्र व
परिवर्तनकामी छात्र संगठन किया। इन्कलाबी मज़दूर केन्द्र द्वारा उत्तराखण्ड सरकार
के इस हमले का जवाब देने के लिये संयुक्त संघर्ष समिति बनायी गयी इसमें क्रा. लो.
स. भी शामिल था। जन-जन तक
व्यापक प्रचार प्रसार करने व सरकार की इस घृणित कार्यवाही के खिलाफ़ आंदोलन छेड़्ने
के मकसद से पर्चा-पोस्टर छापा गया। पर्चा व्यापक तादाद में अवाम के बीच वितरित
किया गया तथा पोस्टर गली-गली चौराहे-चौराहे हर जगह चिपकाया गया। 29 अक्टूबर को उत्तराखण्ड की राजधानी
देहरादून में सचिवालय कूच का आह्वान किया गया।
29 अक्टूबर को विभिन्न ट्रेड युनियनों, जनवादी संगठनों व पार्टियों ने
संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले परेड ग्राउन्ड पर इकट्ठा होकर प्रदेश सरकार की
जनपक्षधर लोगों में खौफ़ पैदा करने वाली इस घृणित कार्यवाही के विरोध में हुंकार
भरते हुए सचिवालय कूच किया। सचिवालय गेट पर बैरीकेडिगं के पास सभा की गयी। फ़र्जी
मुकदमे वापस लेने व फ़र्ज़ी मुकदमे लगाकर
आतंकित करने के लिये जिम्मेदार अधिकारियों
को दण्डित करने की मांग को लेकर मांगपत्र सौंपा गया।
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