आइये! उत्तराखंड आपदा प्रभावित क्षेत्रो में तबाही
झेल रहे लोगों के हक में आवाज उठायें !
साथियो ,
उत्तराखंड
में आई आपदा को लगभग 3 माह गुजर चुके हैं। इन बीते तीन माह ने आम ग्रामीण गरीब
नागरिकों के प्रति हमारे शासकों की घोर उपेक्षा, संवेदनहीनता व लापरवाही तथा कुप्रबंधन को खूब उजागर किया है ना केवल राज्य
सरकार बल्कि संसाधनों से सम्पन्न केंद्र सरकार व उसके समूचे शासन प्रशासन को भी इस
आपदा ने आम जनता के सामने नग्न कर दिया।
16-17
जून को रुद्रप्रयाग व उत्तरकाशी समेत पिथौरागढ़ व अन्य इलाकों में आई आपदा से भयानक
तबाही- बर्बादी होती है। पर्यटकों व स्थानीय लोगों समेत हजारों लोग मारे जाते हैं। तब सबसे ज्यादा जरूरत थी
तत्काल वहाँ फंसे लोगो को बाहर निकालने की, लोगों तक भोजन –पानी -दवा आदि पहुंचाने की आदि। लेकिन हम सबने
देखा कि राज्य का मुखिया आपदा से निपटने में नेतृत्व देने ,आपदा
प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के बजाय दिल्ली पहुंच जाता है। मीडिया में व
चौतरफा थू –थू होने पर, व आपदा में हाई प्रोफ़ाइल पर्यटकों के
भी फंसे होने के चलते फिर पर्यटकों को बाहर निकालने के प्रबंध केंद्र व राज्य
सरकार द्वारा किए गए। जबकि इस वक्त इससे निपटने का काम केवल हर जरूरी संसाधनों से
सम्पन्न व प्रशासनिक ताने-बाने वाली ताकत (सरकार) ही कर सकती थी |
लेकिन आपदा प्रभावित क्षेत्रों में हजारों की
तादाद में जिन गरीब ग्रामीणों के मकान ,खेत व जानवर खत्म हो जाते हैं तथा सैकड़ों की संख्या में वे परिवार जिनके घर के
पुरुष सदस्य आपदा में मारे जाते हैं उनके लिए सरकारों ने घोषणा बाजी के अलावा क्या
किया? इन लोगो को
मेडिकल सुविधाओं व राशन आदि की सख्त जरूरत थी लेकिन सरकारों ने जो दावा करती हैं
कि वह जनता के लिए है उन्होंने क्या किया ? कुछ भी नहीं
सिवाय कुछ औपचारिकताओं के ,नाम का राहत। और हकीकत यही है कि हालात
आज भी बेहद खराब हैं। आखिर सरकारों व उसके प्रशासन की जवाबदेही व ज़िम्मेदारी किसके
प्रति है,यह किन लोगों के लिए काम करता हैं व चिंतित रहता है ? क्या जनता के लिए ? नहीं; बांधों-टनलों, होटल रिज़ॉर्ट,खनन
आदि-आदि के कारोबार में लगे पूंजीपतियों के लिए। और इन्होंने खूब मुनाफा बटोर सकें
इसलिए यहां की भौगोलिक बनावट को ध्यान दिये बिना अनियंत्रित व अवैज्ञानिक तरीके से
पिछड़ी तकनीक का इस्तेमाल करके अंधाधुध ढंग से भारी तादाद में बांधों -सुरंगो, सड़कों आदि आदि का निर्माण किया।
दूसरी ओर अनियंत्रित पर्यटन बेरोक टोक जारी था। अत: देर सबेर इस अंधाधुध
लूट का 16-17 जून जैसी आपदा के रूप में बिस्फोट होना ही था। यही स्थिति व सच पूरे देश के संबंध में भी है। टाटा –बिडला-मित्तल-अंबानी आदि द्वारा देश की
संपत्ति संसाधनों की लूट अब किसी से छुपी नही है, हमारे
जनप्रतिनिधि होने का दावा करने वाले लोग जो कि संसद या विधान सभाओं में बैठते है
तथा पूरा शासन व प्रशासनिक महकमा इन टाटा –अंबानी जैसे देशी विदेशी पूंजी की सेवा में मुस्तैद रहता
है।
और इसलिए सरकारें, उसके विकास का यह पूंजीवादी माडल और ये
पूंजीपति अंतत: यह पूंजीवादी व्यवस्था ही इस आपदा की असल वजह
हैं इसके लिए जिम्मेदार हैं जो कि इसे प्राकृतिक या दैवीय आपदा कहकर अपने गुनाहों
पर पर्दा डालने का काम कर रहे हैं। इसीलिए
यह सब भी हुआ व होता है कि आम गरीब जनता के प्रति बेहद लापरवाह, संवेदनहीन व संकल्पहीन दिखने व रहने वाले ये पूंजीवादी शासक केदारनाथ धाम
को 11 सितंबर से खोल देने के मामले में पूरे प्रशासनिक अमले के साथ संकल्पबद्ध
होकर जुट जाते हैं ऐसा क्यो ? इसे समझना कठिन नहीं है। जैसे ही इस दौरान
केदारनाथ के आस-पास जंगलो में सैकड़ों लाशें मिली जिसकी संख्या और बढ़ती लेकिन इसे
रोक दिया गया और इस इलाके में जाने पर रोक लगा दी गई।
इन
स्थितियों में तब यह सवाल पैदा होना लाजिमी है कि तब क्या किया जाय, समस्याओं को हल करने के संबंध में
किस रास्ते की ओर बढ़ा जाय।निश्चित तौर पर जो रास्ता है वह एकजुट होकर संघर्ष करने
का ही है इसी माह शहीद भगत सिंह का जन्मदिन है जिनका क्रांतिकारी संघर्ष ना केवल
विदेशी लुटेरे (अंग्रेज़ो) के खिलाफ था बल्कि देशी पूंजीपतियों व जमीदारों के खिलाफ
भी था और इस संघर्ष के जरिये वह देश में समाजवाद ( मजदूर-मेहनतकश जनता का राज)
लाना चाहते थे। तब से आज हालात बहुत बदले हैं आज भगत सिंह की विचारधारा व समाजवाद
का उनका लक्ष्य आज बहुत ज्यादा प्रासंगिक हो चुका है इसलिए जरूरत है इस विचारधारा
को समझने की व समाजवाद की दिशा में संघर्ष करने की।
इसीलिए
आपदा में राहत काम व आपदा के असली कारणों को आम जनता तक पहुचाने व अपने हक के लिए
आवाज उठाने-संगठित होने के मकसद से ही “उत्तराखंड आपदा राहत मंच“का गठन
विभिन्न संगठनों व नागरिक अखबार द्वारा किया गया। मंच के नेतृत्व में उत्तरकाशी में कुछ दिन तो
रुद्रप्रयाग के गुप्तकाशी, कालीमठ व ऊखीमठ वाले क्षेत्र में
कई दिन तक मेडिकल कैंप लगाए गए। और अब इसी की अगली कड़ी में मंच द्वारा एक सेमीनार का आयोजन देहरादून में
किया जा रहा है। उम्मीद
है आप इस कार्यक्रम में शिरकत करेंगे।
कार्यक्रम : : द्वारा
विषय :-- ‘‘उत्तराखण्ड आपदा से उपजे सवाल व उनका समाधान’’ ‘उत्तराखण्ड आपदा राहत मंच’
दिनांक :- 29 सितम्बर (रविवार) 2013,
समय :- 10:00 प्रातः से शाम 5 बजे तक।
स्थान :- कालूमल
धर्मशाला, राजा रोड़, प्रिंस चैक (निकट रेलवे स्टेशन), देहरादून।
संपर्क न .
8126975771 , 9837205978
घटक संगठन :-
परिवर्तनकामी छात्र संगठन, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, प्रोग्रेसिव मेडिकोज फोरम,नागरिक (पाक्षिक अखबार), इंकलाबी मजदूर केंद्र, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र, भेल मजदूर ट्रेड यूनियन,
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