Wednesday, 9 October 2013

semeenar on uttaraakhand disaster

कोटद्वार में उत्तराखंड आपदा पर सेमीनार का आयोजन 

क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन ,परिवर्तनकामी छात्र संगठन ,सुमंगला महासंघ व महिला समाख्या के द्वारा कोटद्वार में 8 अक्तूबर को उत्तराखंड आपदा पर एक सेमीनार का आयोजन किया गया। सेमीनार में शहर के अलग अलग संगठनो की भी भागेदारी रही। 
   पूर्व सैनिक संगठन से गोपाल कृष्ण बर्थवाल , भूत पूर्व डी आई जी बलराम सिंह, वरिष्ठ पत्रकार कमल जोशी,कोटद्वार कॉलेज से डॉ . जे एस नेगी , डॉ ऐ एन सिंह तथा नरेन्द्र सिंह ने किया। 
  महिला समाख्या की ओर से प्रीती थपलियाल ,गीता रावत, किरन रावत आदि ने उत्तराखंड आपदा के कारणों पर व उसके प्रभावों पर बातचीत रखी। 
    सुमंगला महासंघ से अध्यक्षा गंगा देवी ने अपनी बातचीत में राज्य सरकार द्वारा बरती गयी आपदा पर आक्रोश व्यक्त किया। 
  भूतपूर्व डी आई जी बलराम सिंह ने केदारनाथ व रामबाडा मै एक दिन हज़ारो लोगो के इकट्ठे होने को राज्य सरकार की अनियोजन व अनियंत्रित पर्यटन की नीति पर प्रश्न चिन्ह किया। 
  वरिष्ठ पत्रकार कमल जोशी ने कहा कि आपदा के बाद राज्य सरकार व इसके मुख्य मंत्री विजय बहुगुणा द्वारा बरती गयी घोर संवेदनहीनता व लापरवाही को उजागर किया गया। 
  पूर्व सैनिक संगठन से गोपाल कृष्ण बर्थवाल ने कहा की सेना का इस्तेमाल जिसे कि आपदा से निपटने का प्रशिक्क्षण हासिल है यदि सही ढंग से होता तो लोगो को बचाया जा सकता था। 
  परिवर्तन कामी छात्र संगठन के प्रतिनिधि पंकज ने कहा कि आपदा को प्राकृतिक या दैवीय कहकर सरकार अपने गुनाहों पर पर्दा डालने का काम कर रही है।
कार्यक्रम में व्यवस्थापक क्रालोस से मुज़नबीन क़मर ने कहा कि अब सवाल आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लोगो का सवाल है उनकी दुशवारियों को हल कैसे किया जाय इस पर सोचने की ज़रुरत है 
  इस बीच `केदार का शोक' जो की उत्तराखंड आपदा राहत मंच द्वारा निर्मित थी का प्रदर्शन भी किया गया। 
 अंत में क्रालोस के भूपाल ने सेमीनार का सम अप करते हुए कहा कि पूंजीवादी आर्थव्यवस्था अपने मुनाफे की हवस में में प्रकृति का विनाश है उत्तराखंड में भी जिस प्रकार  अनियंत्रित तरीके से अकूत मुनाफे की हवस में अनाप-शनाप तरीके से बांधो सड़कों आदि आदि का निर्माण किया जा रहा है वह इस आपदा का कारण रहा है इस आपदा के लिए पूंजीपति वर्ग व उसकी सरकारें जिम्मेदार है व इसके गुनाहगार हैं। इसलिए तात्कालिक संघर्ष के बतौर राज्य सरकार पर संघर्षों के जरिये दबाव बनाकर राहत व पुनर्वास के कामों में तेजी लानी  को मजबूर करना होगा वही दूसरी ओर समाजवाद व्यवस्था के निर्माण के लिए संघर्ष में लोगो की भागेदारी बनानी होगी। 
    कार्यक्रम में गीत महिला समाख्या के साथियों द्वारा प्रस्तुत किये गए।कार्यक्रम का संचालन महिला समाख्या की गीता बगासी ने किया।  . सेमीनार कार्यक्रम में सुशीला देवी ,शंकुंतला देवी,  भागेश्वरी देवी, सिद्धी देवी , श्याम  सिंह रावत अनिल, नारायण , पारुल, रंजना, सुरेन्द्र  अनवर समेत कई लोगों ने शिरकत की।  

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