Thursday, 18 February 2016

रोहित वेमूला की आत्महत्या के लिए जिम्मेवार लोगों को सजा दो

रोहित वेमूला की आत्महत्या के लिए जिम्मेवार लोगों को सजा  दो 


    हैदराबाद विश्वविद्यालय के एक छात्र रोहित वेमूला साम्प्रदायिक फासीवादी ताकतों एवं मानव संसाधन मंत्रालय के दबाव में  आत्महत्या करने को मजबूर होना पड़ा। दरअसल यह आत्महत्या नहीं बल्कि फ़ासीवादी ताकतों द्वारा पैदा की गयी परिस्थितियों का नतीजा थी।  स्पष्टत  यह संघी ताकतों द्वारा की जाने वाली ह्त्या थी।  
    अम्बेडकर स्टूडेंट एसोसिएसन के बैनर तले छात्त्रों ने   संघी ताकतों पर सवाल खड़े किये ।   मुजफ्फरनगर २०१३ के दंगों पर बनी फिल्म 'मुजफ्फरनगर अभी बाकी है' फिल्म के समर्थन में ये छात्र आवाज  उठा रहे थे।  इस फिल्म के प्रदर्शन में संघीय गुंड़ा वाहिनी ने तमाम जगहों पर उपद्रव किया था।  यही नहीं ये छात्र आतंकवाद के नाम पर मुसलमानों को फ़साने व उन्हें फ़ांसी देने पर सवाल खड़े कर रहे थे।  
   यही वो वजह थी जन्हा संघी छात्र संगठन ने उन्हें देश द्रोही के रूप में दुष्प्रचारित  किया।  मारपीट की 
फर्जी ऍफ़ आई आर भी कराई गयी।  बात न बनने पर  अपनी  सरकार की मदद से मानव संसाधन मंत्रालय के जरिये इन छात्रों को कॉलेज से निलंबित करवा दिया गया।  इस निलंबन के विरोध में छात्र लम्बे समय से धरने पर बैठे थे।  देशद्रोही निरंतर दुष्प्रचार तथा मांगों के अनसुनी होने की स्थिति में  रोहित को आत्महत्या का कदम उठाना पड़ा।  
       दरअसल फासीवादी संघ अपने एक देश एक भाषा एक संस्कृति को पूरे देश पर थोप देना चाहता है और वह लगातार इसके लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहा है।  रहन सहन , खान पान , आदिन के नाम पर वह अपने घृणित एजंडे को लगातार आगे बढ़ा रहा है।  आज देश में हर किस्म की असहमति को देश द्रोह साबित करने की कोशिशें संघी ताकतें कर रही हैं। जनवादी चेतना व जनवादी अधिकारों पर वह लगातार हर मुद्दे के जरिये हमला कर रहे हैं।   
    सही मायने में संघी फासीवादी ताकतों व कॉर्पोरेट घरानों का घृणित गठजोड़ आज भारत को लगातार उस दिशा में धकेल रहा है जहां पूंजीवादी  जनवाद का सीमित दायरा  भी  ख़त्म हो जाये  . नंगी तानाशाही स्थापित हो जाए। नए अार्थिक सुधारों को तेजी से आगे बढ़ाने व  मेहनतकश जनता के अपने शोषण उत्पीड़न व अन्याय  के विरोध में उठती आवाज को इसी ढंग से नियत्रिंत किये जाने की जरूरत के चलते ही यह घृणित गठजोड़ कायम हुआ है।  
    अब वक्त है संघी ताकतों के हर कदम का जवाब दिया जाय व पूूंजीवाद के विरोध में संघर्ष विकसित किया जाय।  

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