Thursday, 23 March 2023

23 मार्च 1931 के शहीदों की याद में


 
भगत सिंह की बात सुनो
इंकलाब की राह चुनो


       23 मार्च 1931 के शहीदों को याद करने के साथ उनके विचारों पर चलने की आज सख्त जरूरत है। भगत सिंह जिस संगठन से थे उसका नाम था हिंदुस्तान समाजवादी गणतांत्रिक संघ। शहीदे आजम भगत सिंह इस संगठन को वैचारिक दिशा देने वाले साहस और ऊर्जा से भरपूर नौजवान थे।

      1927 से 1931 के बीच भगत सिंह ने कई लेख लिखे और सम्पादित किये। भगत सिंह की वर्गीय पक्षधरता सुस्पष्ट थी। भगत सिंह अपने जेल जीवन के दौरान मार्क्सवाद के निकट पहुंचने की ओर बढ़ते गए। उनकी यात्रा राष्ट्रवादी क्रांतिकारी से समाजवादी होने की ओर बढ़ी।

      भगत सिंह व उनके साथियों ने साफ तौर पर कहा कि क्रांति से उनका अभिप्राय अन्याय पर आधारित मौजूदा व्यवस्था का खात्मा है कि कांग्रेस धनिकों का संगठन है यह जमीदारों और पूंजीपतियों के पक्ष में कुछ सुधार करने तक सीमित है।

     भगत सिंह ने यह भी कहा कि साम्राज्यवाद डाकेजनी के सिवाय कुछ भी नहीं है जब तक एक राष्ट्र द्वारा दूसरे राष्ट्र का और एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति का शोषण खत्म नहीं हो जाता तब तक मानवता को उनके दुखों से मुक्ति नहीं मिल सकता      भगत सिंह ने कहा कि समाज का साम्यवादी सिद्धांतों पर पुनर्गठन करने की जरूरत है। इसके लिए नौजवानों को किसानों और मजदूरों को संगठित करना होगा।

     21 वीं सदी के इस दौर में भगत सिंह की यह बात आज कई गुना ज्यादा प्रासंगिक है। विद्यार्थियों, नौजवानों के बीच आज फिर से भगत सिंह और उनके साथियों के विचारों को व्यापक रूप में ले जाने की सख्त जरूरत है। इंकलाब यानी समाज का समाजवादी पुनर्गठन ही मानवता को आज के अंधेरे दौर से मुक्ति दिला सकता है।



No comments:

Post a Comment

चुनाव की आड़ में बिहार में नागरिकता परीक्षण (एन आर सी)

      चुनाव की आड़ में बिहार में नागरिकता परीक्षण (एन आर सी)       बिहार चुनाव में मोदी सरकार अपने फासीवादी एजेंडे को चुनाव आयोग के जरिए आगे...