Sunday, 22 November 2015

    एक बार फिर उजागर हुआ शासकों  का पाखण्ड 


पेरिस में आतंकवादी हमले के बाद एक बार से अमेरिका फ्रांस समेत दुनिया भर के पूंजीवादी शासक आतकवाद के मसले पर एकसुर होते दिख रहे हैं । भारत के संघी फासीवादी मोदी तक सभी आतंकवाद की निंदा कर रहे हैं फ्रांस में हुए हमले को  मानवता के खिलाफ घोषित करते हुएइसे नेस्तनाबूत करने की बात कर रहे हैं।  शार्ले हब्दों  घटना के बाद एक बार फिर यह फ्रांस में होता दिख रहा है।  तब भी अभिव्यक्ति के अधिकार के नाम पर अभिव्यक्ति का गला घोंटने वालों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया था।  
पेरिस हमले की  जिम्मेदारी आई एस आई एस ने ली है।अन्य आतंकवादी संगठनों की तरह इसे भी साम्राज्यवादियों  विशेषकर अमेरिकी साम्रज्यवाद द्वारा खड़ा किया गया पाला पोषा गया  है। अब यह अपनी गति में इन घटनाओं को अंजाम दे रहाहै।  अब आई एस आई एस की बर्बरता चर्चा खूब हो रही हैं.  लेकिन खुद अमेरिकी साम्रज्यवादी व अन्य साम्रज्यवादी आतंक ने इराक अफगानिस्तान समेत दुनिया भर में लाखों लोगों का कत्लेआम किया है जिसे भुला दिया जाता है.  इसधार्मिक कट्टरपंथी आतंकवाद को पैदा करके फिर इसी के नाम पर देशों में हस्तक्षेप व हमला  किया जाता है। आई एस जैसे कट्टरपंथी आतंकवादी साम्राज्यवादियों द्वारा कियेजाने वाले इस हमले व  बर्बरता से खुद को मज़बूत करते हैं  व खुद को  जायज ठहराते हैं  नये लोगों कोजोड़ते हैं । और जो लोग साम्रज्यवाद के दुष्चक्र व हमले के शिकार हैं उन्ही को अपने हमले का निशाना बनाते हैं।  
 साम्राज्यवादी मुल्क और ये  आतंकवादी इस तरह एक दूसरे को  मदद पहुंचाते  हुए  राजनीतिक लक्ष्य को साधते हैं। 
     पिछड़े पूंजीवादी देशों के शासक भी  इसका इस्तेमाल अपने  हित में करते हैं । भारतीय शासकों द्वारा भी आतंकवाद को इस्लाम का पर्याय बनाने में देश के  स्तर पर भरपूर प्रयास हुए हैं । संघी सरकार तो इसे मामले में और भी चार कदम आगे है। इस तरह इन्होने इसके जरिये  समाज में  फासीवादीकरण को आगे बढ़ाया है।
  कुल मिलाकर  शासकों और आतंकवादी समूहों के आतंक का  समाधान केवल  जनवादी व  क्रांतिकारी  संघर्षों  के जरिये ही हो सकता है ।अंतत: इस समस्या को पैदा करने वाले पूंजीवाद  कोई समाधान नहीं है बल्कि समाजवादी समाज की स्थापना ही इसका मुकम्मिल जवाब है।  

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