Friday, 31 March 2023

जी 20 और भारत


       जी 20 और भारत
        

       जी 20 की इस साल की अध्यक्षता भारतीय शासक कर रहे हैं। इस समूह में दुनिया भर में लूटखसोट मचाने और कई देशों की संप्रभुता को तहस नहस करने वाले साम्राज्यवादी देशों तथा विकसित पूंजीवादी देशोंऔर पिछड़े पूंजीवादी देश हैं। इसमें 19 देश और एक यूरोपीय यूनियन है।   

इस मंच को 1999 में गठित किया गया है। साम्राज्यवादी देशों ने 'निजीकरण उदारीकरण वैश्वीकरण' की नीतियों को आसानी से लागू कर सकने की मंशा से क्षेत्रीय पूंजीवादी ताकतों को लेकर इस समूह का गठन किया था।  भारत, चीन, ब्राज़ील, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की आदि जैसे देश इसमें शामिल हैं। आज स्थिति यह है कि एक ओर चीन एक नई साम्राज्यवादी ताकत के रूप में सामने है तो दूसरी तरफ इस समूह के भीतर तीखे विरोध भी हैं इसके साथ यह मुख्य चीज जिस पर सभी एकजुट है वह है दुनिया भर में अलग अलग देशों की संसाधनों  की लूट खसोट को बढ़ाना है मजदूर मेहनतकश जनता की मेहनत को निचोड़ना है।

        इस मंच के माध्यम से नई आर्थिक नीतियों के जरिए संसाधनों और मजदूर मेहनतकश आबादी की मेहनत की लूट खसोट मचाने, जनता के संघर्षों को कुचलने के लिए हर साल जी 20 की बैठकें बारी बारी से अलग अलग देशों में होती हैं। मोदी सरकार ने 2020 में आयोजित बैठक को 2024 के चुनाव के मद्देनजर व्यापक प्रचार के मौके में बदल डालने के लिए खिसकाकर 2023 में करने की योजना बनाई। इसी के तहत इस साल इसकी प्रकिया बैठक अलग अलग जगह देश भर में होनी है फिर सितंबर में दिल्ली में इसका सम्मेलन होना है।

       मार्च के अंतिम सप्ताह में इसकी बैठक उत्तराखंड के नैनीताल जिले के रामनगर क्षेत्र में हुई। रामनगर तक पंतनगर हवाई क्षेत्र से विदेशी और देशी लुटेरे प्रतिनिधियों को पहुंचाने से पहले सड़क मार्ग पर पड़ने वाली दुकानों को बुलडोज़र से धवस्त कर दिया गया। इसी तरह के मामले आने वाले वक्त में और सामने आते जाएंगे।

        आज दुनिया के जो  हालात उसे इस मंच के भीतर अलग अलग देशों की टकराहटों, द्वन्दों तथा खुद देश के भीतर के आर्थिक आर्थिक राजनीतिक हालात से समझा जा सकता है।

        भारत में मोदी सरकार ने एक ओर घोर पूंजीपरस्त नीतियों को सरपट भगाया है तो दूसरी तरफ हिंदू फासीवादी राजनीति के दम पर ध्रूवीकरण को तेजी से आगे बढ़ाया है। भारतीय समाज आज सबसे ज्यादा राजनीतिक तौर पर विभाजित है। मुस्लिमों को दोयम दर्जे की स्थिति में धकेला गया है। हिन्दू आबादी का ठीकठाक हिस्सा इस हिंदुत्व की राजनीति के साथ गोलबंद है।

        एक ओर यह है तो दूसरी तरफ पाकिस्तान और चीन के शासकों के साथ अंतर्विरोध तीखे हुए हैं।

        भारत से बाहर देखें तो दुनिया दो खेमे में बंटी हुई है एक ओर अमेरिका की अगुवाई में ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और कनाडा व जापान के साथ नाटो तो दूसरी तरफ रूस और चीन। अमेरिकी शासकों के अपने प्रभुत्व की मंशा के चलते दोनों खेमों में अंतर्विरोध तीखे हुए हैं। इसका नतीजा यूक्रेन में अमेरिका और रूस के बीच चल रहा युद्ध है। जिसमें दोनों ही आमने सामने नहीं मगर परोक्ष संघर्ष में है।

        इससे इतर इन सभी देशों में मजदूर वर्ग और बाकी जनता से शासकों के अंतर्विरोध तीखे हुए हैं। फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन में इस वक़्त बड़ी हड़तालें और संघर्ष सामने हैं। शासक वर्ग जनता पर हमलावर है। सभी जगह दक्षिणपंथी या फासीवादी पार्टियां उभार पर हैं।  

        जी 20 की बैठक इसी घोर जनविरोधी आर्थिक नीति के साथ घोर जनवाद विरोधी दक्षिणपंथी या फासीवादी राजनीति को आगे बढ़ा रही है। एक ओर भारत में फासीवादी मोदी सरकार में व्यवहार में अघोषित निरंकुशता की स्थिति बना दी है तो दूसरी तरफ रूस में पुतिन अंधराष्ट्रवाद के दम पर विपक्ष और जन विरोध को ध्वस्त करते हुए निरंकुशता की स्थिति कायम कर चुके हैं।






        
          
           

       

Thursday, 23 March 2023

23 मार्च 1931 के शहीदों की याद में


 
भगत सिंह की बात सुनो
इंकलाब की राह चुनो


       23 मार्च 1931 के शहीदों को याद करने के साथ उनके विचारों पर चलने की आज सख्त जरूरत है। भगत सिंह जिस संगठन से थे उसका नाम था हिंदुस्तान समाजवादी गणतांत्रिक संघ। शहीदे आजम भगत सिंह इस संगठन को वैचारिक दिशा देने वाले साहस और ऊर्जा से भरपूर नौजवान थे।

      1927 से 1931 के बीच भगत सिंह ने कई लेख लिखे और सम्पादित किये। भगत सिंह की वर्गीय पक्षधरता सुस्पष्ट थी। भगत सिंह अपने जेल जीवन के दौरान मार्क्सवाद के निकट पहुंचने की ओर बढ़ते गए। उनकी यात्रा राष्ट्रवादी क्रांतिकारी से समाजवादी होने की ओर बढ़ी।

      भगत सिंह व उनके साथियों ने साफ तौर पर कहा कि क्रांति से उनका अभिप्राय अन्याय पर आधारित मौजूदा व्यवस्था का खात्मा है कि कांग्रेस धनिकों का संगठन है यह जमीदारों और पूंजीपतियों के पक्ष में कुछ सुधार करने तक सीमित है।

     भगत सिंह ने यह भी कहा कि साम्राज्यवाद डाकेजनी के सिवाय कुछ भी नहीं है जब तक एक राष्ट्र द्वारा दूसरे राष्ट्र का और एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति का शोषण खत्म नहीं हो जाता तब तक मानवता को उनके दुखों से मुक्ति नहीं मिल सकता      भगत सिंह ने कहा कि समाज का साम्यवादी सिद्धांतों पर पुनर्गठन करने की जरूरत है। इसके लिए नौजवानों को किसानों और मजदूरों को संगठित करना होगा।

     21 वीं सदी के इस दौर में भगत सिंह की यह बात आज कई गुना ज्यादा प्रासंगिक है। विद्यार्थियों, नौजवानों के बीच आज फिर से भगत सिंह और उनके साथियों के विचारों को व्यापक रूप में ले जाने की सख्त जरूरत है। इंकलाब यानी समाज का समाजवादी पुनर्गठन ही मानवता को आज के अंधेरे दौर से मुक्ति दिला सकता है।



Friday, 2 September 2022

दलित जगदीश चंद्र हत्या मामले में लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों पर मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार करो

  
       उत्तराखंड राज्य के अल्मोड़ा जिले  के सल्ट विधान सभा क्षेत्र से सवर्ण लड़की से प्रेम विवाह करने वाले दलित जगदीश चंद्र की लड़की के परिजनों ने हत्या कर दी।हत्यारों को गिरफ्तार कर लिया गया है। यदि पुलिस अधिकारियों व कर्मियों ने इस मामले में भारी लापरवाही नहीं की होती तो आज जगदीश चंद्र जिंदा होते। 
       सवर्ण लड़की द्वारा पुलिस अधिकारियों को अपने पति जगदीश और खुद की सुरक्षा के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के लिए प्रार्थना पत्र भेजा गया था। मगर अधिकारियों के स्तर से कोई सुरक्षा नहीं दी गयी। और भारी लापरवाही बरती गई।
       इस बीच सवर्ण लड़की के परिजनों को मौका मिल गया। फिर नतीजा जगदीश चंद्र की हत्या के रूप में सामने आया। यह घटना घोर निंदनीय और घृणित है। 
        यह घटना दिखाती है कि जातिवाद का जहर आज भी विशेषकर सवर्ण समुदाय के एक हिस्से के दिमाग में रचा बसा है। जिसका नतीजा इस तरह की ऑनर किलिंग के रूप में सामने आया है।
      अब हत्यारे परिजनों की गिरफ्तारी हो चुकी है मगर जिन पुलिसकर्मियों और अधिकारियों पर सुरक्षा का कार्यभार था उन्होंने इस मामले में भारी लापरवाही की है या वे खुद भी इसी सवर्ण मानसिकता के शिकार रहे हैं।         इसलिये जरूरी है कि इनके खिलाफ भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाय। ये भी हत्या के लिए परोक्ष तौर पर जिम्मेदार है। यदि पुलिसकर्मियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होती है तब यह अन्य जगह भी लापरवाही ना बरतने का संदेश देगा। इस तरह की ऑनर किलिंग की घटनाओं पर कुछ हद तक रोक लगेगी। 
      इसी के साथ ही 'हिंदू राष्ट्र' का नारा देने वाले संघी और भाजपाई भी इस तरह की घटनाओं के लिए परोक्ष तौर पर जिम्मेदार हैं। इनका ' हिंदू राष्ट्र' का साफ मतलब ही है दलित और महिलाएं हिंदू राजाओं महाराजाओं के राज में भयानक उत्पीड़ित थी आज फिर से बड़े स्तर पर उत्पीड़ित होंगे। ये उत्पीड़ित होने वाले गरीब मेहनतकश या आम जनसमुदाय के हिस्से ही होंगे।
      जब से ये हिंदू राष्ट्र का नारा देने वाले लोग सत्ता पर आए हैं सवर्ण समुदाय से उन लोगों के हौंसले बुलंद हो गए हैं जो सवर्ण हिंदू मानसिकता से ग्रसित हैं।  और इसके नतीजे के बतौर आम दलितों और महिलाओं पर अत्याचार बढ़ गए हैं। इसलिये जरूरी है कि इनका, इनके  हिंदू राष्ट्र के विचारों का विरोध किया जाय।
    





Tuesday, 23 August 2022

बिल्किस बानो की बलात्कारियों की रिहाई के विरोध में


     बिल्किस बानो के बलात्कारियों और उसके परिवार के 7 लोगों समेत 3 साल की मासूम बच्ची का कत्ल कर देने के अपराध में 11 लोगों को आजीवन की कारावास की सजा हुई थी।
        मगर ठीक 15 अगस्त 2022 को जब लालकिले से प्रधानमंत्री मोदी तमाम दावे कर रहे थे और आजादी के अमृत महोत्सव का जिक्र कर रहे थे ठीक उसी दिन बिल्किस बानो के अपराधियों को गुजरात सरकार द्वारा माफीनामा देकर रिहा कर दिया गया। जिस कमेटी ने इन अपराधियों की रिहाई की संस्तुति दी उसमें भाजपा से जुड़े 5 लोग थे। 
      मामला यहीं तक सीमित नहीं रहा अपराधियों को जिन पर जघन्य हत्या और बलात्कार के मुकदमे दर्ज थे उन्हें मिठाई खिलाई गयी और इनका फूल मालाओं से स्वागत किया गया।
          मोदी और मोदी सरकार ने इस रिहाई के खिलाफ एक शब्द बजी अभी तक नहीं बोला है। इसका अर्थ साफ है कि यह सब ऊपर के इशारे पर हुआ है।
        इस तरह अब खुलेआम एक बलात्कारियों और हत्यारे लोगों के पक्ष में भाजपा दृढ़तापूर्वक खड़ी हुई है। भाजपा, गुजरात सरकार और मोदी तथा इनकी केंद्र सरकार ने एक धर्मविशेष के खिलाफ अपराध करने को प्रोत्साहित किया है। साथ ही साथ महिलाओं की स्थिति को, उनके संघर्षों करने के साहस को, अपने अपराधियों को चुनौती देने और दंडित करवाने की चाहत को कमजोर किया है।
         मामला एक तरह से केवल एक धर्म विशेष तक सीमित नहीं रहेगा। यह ध्रुवीकरण की  फासीवादी राजनीति को आगे बढ़ाने का घटिया प्रयास है। यह एक तरह से भाजपा और संघी लम्पट तत्वों को किसी भी आम महिला के साथ हिंसा और अपराध करने को उत्साहित करने और बढ़ावा देने वाला कृत्य है। इसलिये जरूरी है कि इसके खिलाफ संघर्ष किया जाय। तथा एकजुट होकर रिहा किये गए बलात्कारियों और हत्यारे तत्वों की रिहाई को रद्द करने और इन्हें दंडित किये जाने के एकजुट होकर आवाज बुलंद की जय।
    




अमेरिकी साम्राज्यवाद और इजरायली विस्तारवाद तथा ईरान पर थोपा युद्द और युद्धविराम

  अमेरिकी साम्राज्यवाद और इजरायली विस्तारवाद तथा ईरान पर थोपा युद्द और युद्धविराम        अंततः अमेरिकी साम्राज्यवादियों को फिलहाल पीछे हटना ...