जनवादी अधिकारों के लिए संघर्षशील व साम्राज्यवाद विरोधी क्रांतिकारी संगठन
Saturday, 4 November 2023
इजरायली फासीवादी सत्ता द्वारा किये जा रहे नरसंहार का विरोध करो !
Thursday, 6 July 2023
क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन का आठवां सम्मेल
क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन का आठवां सम्मेलन
क्रालोस का आठवां सम्मेलन 24- 25 जून 2023 को उत्तर प्रदेश के बरेली शहर में आएशा पैलेस में आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली के प्रतिनिधियों ने भागीदारी की।
सम्मेलन की शुरुआत 24 जून को प्रातः 8 बजे झंडारोहण के साथ शुरू हुई। संगठन के अध्यक्ष पी पी आर्या ने झंडारोहण किया। झंडारोहण की कार्यवाही के बाद प्रगतिशील सांस्कृतिक मंच ने ( मेरा रंग दे बसंती चोला ) गीत प्रस्तुत किया। इसके बाद अलग अलग संघर्षों में दुनिया और देश के भीतर शहीद हुए शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई और 2 मिनट का मौन रखा गया।
अध्यक्षीय संबोधन में पी.पी.आर्या ने कहा कि संगठन अपने पच्चीस साल की यात्रा में तमाम उतार चढ़ावों से गुजरते हुए आगे बड़ा है। संगठन जन सरोकारों से जुड़े मुद्दों तथा जनवादी , संवैधानिक अधिकारों के लिए क्षमताभार संघर्ष करता रहा है। संगठन ने मेहनतकश जनता और शोषित उत्पीड़ित समूहों के न्याय प्रिय आंदोलनों का समर्थन किया हैं तो कई मौकों पर आंदोलनों को नेतृत्व देने का प्रयास किया है।
इसके बाद अध्यक्ष ने सम्मेलन के संचालन के लिए एक तीन सदस्यीय संचालक मंडल का नाम प्रस्तावित किया जिसे सदन में उपस्थित प्रतिनिधियों ने अनुमोदित किया। इसके बाद सम्मेलन के बंद सत्र की शुरुआत हुई।
सम्मेलन में राजनीतिक रिपोर्ट तथा सांगठनिक रिपोर्ट पर चर्चा की गयी। राजनीतिक रिपोर्ट के अंतरराष्ट्रीय परिस्थिति वाले हिस्से पर बात रखते हुए वक्ताओं ने कहा कि 2007 से शुरू हुआ विश्व अर्थव्यवस्था का संकट कोरोना महामारी के बाद और भी घनीभूत हुआ है। इस संकट ने दुनिया में राजनीतिक, सामाजिक, और सांस्कृतिक संकट को घनीभूत किया है। दक्षिणपंथी, फासीवादी राजनीति का उभार बढ़ा है। कई देशों में राजनीतिक अस्थिरता भी बढ़ी है। इस चौतरफा संकट ने समाज में एकाकीपन, भरोसे की कमी, आत्मकेंद्रीयता को बढ़ाया है।
वक्ताओं ने यह भी रेखांकित किया कि चीन के एक नई साम्राज्यवादी ताकत के रूप में सामने आने और रूस के फिर से उभार ने साम्राज्यवादियों के बीच टकराहट को बढ़ाया है। जिससे एक और रूस यूक्रेन युद्ध में रूसी साम्राज्यवादी और अमेरिका के नेतृत्व में पश्चिमी साम्राज्यवादी शासकों की सनक का शिकार जनता को होना पड़ रहा है। दुनिया में शरणार्थी और प्रवासी संकट भी गहरा गया है। दुनिया में बढ़ते फासीवादी उभार ने मजदूर मेहनतकश जनता सहित शोषित उत्पीड़ित समूहों पर हमलों को तीखा किया है। जनवादी अधिकारों पर भी हमले तेज हुए हैं।
इस उत्पीड़न , शोषण के खिलाफ पैदा हो रहे संघर्षों के दौरान जनता एक बेहतर समाज की ओर भी आगे बढ़ेगी ऐसी आशा सम्मेलन ने जाहिर की।
इसी तरह राष्ट्रीय परिस्थिति वाले हिस्से पर चर्चा करते हुए कहा गया कि विश्व परिस्थियों से भारत भी अछूता नहीं है। हमारे यहां भी आर्थिक , सामाजिक, राजनीतिक तथा सांस्कृतिक स्थितियां विकराल स्थिति ग्रहण कर रही हैं। देश में गरीबी , बेरोजगारी, महंगाई, भुखमरी, असमानता लगातार बढ़ रही है। मजदूरों मेहनतकशों पर हमले तेज हुए हैं। अल्पसंख्यक समुदाय को हाशिये पर धकेलने के हिंदू फासीवादी शासकों द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं। मेहनतकश जनता के संवैधानिक, जनवादी व नागरिक अधिकारों का गला घोंटा जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ फासीवादी एजेंडों को आगे बढ़ाने के लिए देश में अराजकता और हिंसा का माहौल पैदा किया जा रहा है। उत्तराखंड , उत्तर प्रदेश , मध्य प्रदेश में 'लव जिहाद', 'लैंड जिहाद' आदि फासीवादी एजेन्डे फासीवादियों के मंसूबों को दिखाती है। वही मणिपुर जैसी स्थितियां दिखाती हैं वर्तमान शासक पूरे देश को नफरत की आग में झोंक देना चाहते हैं।
इस दौरान देश ने नागरिकता कानून विरोधी आंदोलन, ऐतिहासिक किसान आंदोलन, महिला पहलवानों के आंदोलन और जगह जगह काफी लंबे चल रहे मजदूर आंदोलन इसके अलावा देश भर जारी जनवादी आंदोलन एक उम्मीद की किरण भी दिखाते हैं। इन सब परिस्थितियों पर बात करने के बाद सदन ने राजनीतिक रिपोर्ट को पास किया।
सदन में सांगठनिक रिपोर्ट पर भी विस्तार से चर्चा हुई जिसमे पिछले सम्मेलन से अब तक की कार्यवाहियों का ब्यौरा पेश किया गया। तथा संगठन ने अपनी उपलब्धियों एवं कमियों खामियों को चिन्हित करते हुए अगले सम्मेलन तक के लिए अपनी लिए कार्य योजना पेश की।
अगले दिन सम्मेलन ने विभिन्न सामायिक विषयों पर प्रस्ताव पास किए। ये प्रस्ताव दलितों अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों के विरोध में, समान नागरिक संहिता के संबंध में, चारों श्रम संहिताओं के विरोध में, बढ़ते फासीवादी हमलों के विरोध में, एन पी एस के विरोध में , मणिपुर में जारी हिंसा के संबंध में आदि मामलों पर थे। जिसे सम्मेलन में पास किया।
इसके बाद चुनाव हुए। अध्यक्ष के रूप में पी पी आर्या और महासचिव के रूप में भूपाल का चुनाव किया गया। संगठन के नवनिर्वाचित अध्यक्ष ने बिरादर संगठनों से आए पर्यवेक्षक साथियों और तकनीकी सहयोग के लिए आए साथियों का धन्यवाद किया जिनकी वजह से सम्मेलन ठीक से आयोजित हो पाया।
इसके बाद दोपहर दो बजे से खुले सत्र का आरम्भ किया गया। जिसमे शहर से तमाम ट्रेड यूनियन, सामाजिक संगठनों और सहयोगी संगठनों के साथी उपस्थित रहे। सभी साथियों ने संगठन की सम्मेलन के लिए बधाई दी। तथा नई कमेटी व पदाधिकारियों को बधाई दी। सभी ने संगठन से जनवादी आंदोलन को आगे बढ़ाने की आशा व्यक्त की। खुले सत्र में वक्ताओं ने आज की पतिस्थियों और देश दुनियां में मेहनतकश जनता के हालत, उस पर किए जा रहे हमलों, सरकार की जन विरोधी नीतियों, संघर्षों के दमन , दलितों अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों, जनवादी व संवैधानिक अधिकारों के हनन आदि मसलों पर चिंता जाहिर करते हुए बातें की।
खुले सत्र को बरेली ट्रेड यूनियंस के महामंत्री संजीव मेहरोत्रा, बरेली कॉलेज के कर्मचारी नेता जितेंद्र मिश्र, ट्रेड यूनियन नेता महेश गंगवार, पी यू सी एल के साथी एड यशपाल सिंह, मजदूर सहयोग केंद्र के साथी दीपक सांगवाल, इंकलाबी मजदूर केंद्र के साथी रामजी सिंह, परिवर्तनकामी छात्र संगठन के महासचिव साथी महेश, प्रगतिशील महिला एकता केंद की साथी हेमलता, सामाजिक न्याय फ्रंट के साथी सुरेंद्र सोनकर, टेंपो यूनियन के साथी कृष्ण पाल, सामाजिक कार्यकर्ता साथी ताहिर बेग, प्रगतिशील सांस्कृतिक मंच के साथी ओम प्रकाश, ट्रेड यूनियन नेता सलीम अहमद ने संबोधित किया।
अंत में संगठन के नवनिर्वाचित अध्यक्ष साथी पी पी आर्या ने वर्तमान परिस्थितियों और संघर्ष की जरूरत पर विस्तार से बात रखी और सभी साथियों का क्रांतिकारी अभिवादन किया। प्रगतिशील सांस्कृतिक मंच के साथियों ने बंद सत्र और खुले सत्र में जोशीले क्रांतिकारी गीतों के माध्यम से सम्मेलन में क्रांतिकारी उत्साह बनाए रखा इसके लिए उन्हें धन्यवाद।
खुले सत्र के बाद एक सांकेतिक जुलूस निकाला गया। इस बीच में पुलिस प्रशासन ने जुलूस में हस्तक्षेप किया व अकारण ही टकराव पैदा करने की कोशिश की। जुलूस झंडे , बैनर, तख्तियों पर लिखे नारों से लोगों को आकर्षित कर रहा था। जुलूस में जोशीले नारे लगाते हुए साथी आगे बढ़ रहे थे। जुलूस सम्मेलन आएशा पैलेस से शुरू होकर जगत पुर पुलिस चौकी होते हुए बीसलपुर चौराहे तक गया उसके बाद उसी रास्ते वापस आ गया। सम्मेलन स्थल पर साथियों ने उत्साह से गीत गाए। तत्पश्चात सम्मेलन की पूरी कार्यवाही सफलता पूर्वक संपन्न हुई।
Thursday, 13 April 2023
जालियावाला बाग के शहीदों की स्मृति में
ब्रिटिश गुलामी से मुक्ति की आकांक्षा में अनगिनत कुर्बानियां भारतीय जनता ने दी थी। इसी कड़ी में बैशाखी के दिन 1919 में हुई कुर्बानी को हमें याद करने की जरूरत है। बैशाखी के दिन 13 अप्रेल 1919 को अमृतसर के जलियावाला बाग में हज़ारों हिन्दू-मुस्लिम-सिख जनता सभा कर रही थी। ब्रिटिश हुकूमत ने जनता के संघर्षों को रोकने, कमजोर करने और खत्म करने के लिए दमनकारी कानून 'रौलेट एक्ट' लागू किया था। जिसके हिसाब से केवल शक के आधार पर किसी को भी गिरफ्तार किया जा सकता था और बिना सुनवाई के अनिश्चित काल के लिए जेल में ठूंसा जा सकता था। इसका सार था -'न अपील, न दलील, न वकील' । इसके विरोध में जनता देश भर में सड़कों पर उमड़ आयी थी। 13 अप्रेल को बैशाखी के दिन ही अमृतसर में जालियावाला बाग में सभा हो रही थी। हज़ारों लोग स्त्री, पुरुष, वृद्ध और बच्चे सभी मैदान में थे। मुस्लिम, सिक्ख और हिन्दू सभी एक जान सभा में रौलेट एक्ट का विरोध कर रहे थे।
इस निहत्थी जनता को घेरकर अंग्रेजी हुकूमत ने सैकड़ो लोगों का कत्ल कर दिया। आज़ादी के संघर्ष को खून में डुबो दिया।
इस बर्बर हत्याकांड के विरोध में नानक सिंह ने कविता लिखी 'खूनी बैशाखी'। इसका शीर्षक था 'रोलट बिल दा रौला'। इसकी कुछ पंक्तियां इस प्रकार है -
रोलट बिल ने घतिया आन रौला,
सारे हिन्द दे लोक उदास होए। .....
पंच वजे अप्रैल दी तेहरवीं न,
लोकीं बाग वल होए रवान चले।
दिलां विच इनसाफ दी आस रख के,
सारे सिख हिन्दू मुसलमान चले।
विरले आदमी शहिर विच रहे बाकी,
सब बाल ते बिरध जवान चले।
अज दिलां दे दुख सुणान चले,
सगों आपने गले कटवाण चले।
आज़ादी की मशाल इस कत्लेआम के बावजूद मद्धिम ना हुई। बल्कि संघर्षों का नई लहर खड़ी हुई। मगर अफसोस कि इतिहास कुछ इस तरह आगे बढ़ा कि जनता के इस संघर्ष पर सवार होकर अंग्रेजी हुकूमत के साथ सांठगांठ कर रहा पूंजीपति वर्ग और जमींदार वर्ग अपनी पार्टी कांग्रेस के जरिए सत्ता पर काबिज हो गया। मुस्लिम लीग, आर.एस.एस और हिन्दुमहासभा तो इस संघर्ष के तूफानी दौर में अंग्रेजी हुकुमत की गोद में बैठकर 'बांटो और राज करो' में लिप्त थी। आजादी के बाद इतिहास इस तरह आगे बढ़ा कि दोनों ही (संघ और कांग्रेस) जनता के खिलाफ एक हो गए और एक दूसरे की मदद से आगे बढ़ते रहे।
आज वही आरएसएस व भाजपा कांग्रेस से सांठ गाठ व सहयोग से और कॉरपोरेट पूंजी के अभूतपूर्व सगयोग से सत्ता में है मोदी शाह और भाजपा संघ कॉरपोरेट पूंजी के नंगी लूट खसोट के लिए जनता की स्थिति को फिर गुलामी की स्थिति में धकेल देने के घृणित काम में लिप्त हैं।
जलियावाला बाग के शहीदों की कुर्बानी हमें याद दिलाती है कि आम जनता को धर्म की ज़हरीली विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष करने की फिर से सख्त जरूरत है। यही जालियावाला बाग के शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
Friday, 31 March 2023
जी 20 और भारत
जी 20 और भारत
जी 20 की इस साल की अध्यक्षता भारतीय शासक कर रहे हैं। इस समूह में दुनिया भर में लूटखसोट मचाने और कई देशों की संप्रभुता को तहस नहस करने वाले साम्राज्यवादी देशों तथा विकसित पूंजीवादी देशोंऔर पिछड़े पूंजीवादी देश हैं। इसमें 19 देश और एक यूरोपीय यूनियन है।
इस मंच को 1999 में गठित किया गया है। साम्राज्यवादी देशों ने 'निजीकरण उदारीकरण वैश्वीकरण' की नीतियों को आसानी से लागू कर सकने की मंशा से क्षेत्रीय पूंजीवादी ताकतों को लेकर इस समूह का गठन किया था। भारत, चीन, ब्राज़ील, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की आदि जैसे देश इसमें शामिल हैं। आज स्थिति यह है कि एक ओर चीन एक नई साम्राज्यवादी ताकत के रूप में सामने है तो दूसरी तरफ इस समूह के भीतर तीखे विरोध भी हैं इसके साथ यह मुख्य चीज जिस पर सभी एकजुट है वह है दुनिया भर में अलग अलग देशों की संसाधनों की लूट खसोट को बढ़ाना है मजदूर मेहनतकश जनता की मेहनत को निचोड़ना है।
इस मंच के माध्यम से नई आर्थिक नीतियों के जरिए संसाधनों और मजदूर मेहनतकश आबादी की मेहनत की लूट खसोट मचाने, जनता के संघर्षों को कुचलने के लिए हर साल जी 20 की बैठकें बारी बारी से अलग अलग देशों में होती हैं। मोदी सरकार ने 2020 में आयोजित बैठक को 2024 के चुनाव के मद्देनजर व्यापक प्रचार के मौके में बदल डालने के लिए खिसकाकर 2023 में करने की योजना बनाई। इसी के तहत इस साल इसकी प्रकिया बैठक अलग अलग जगह देश भर में होनी है फिर सितंबर में दिल्ली में इसका सम्मेलन होना है।
मार्च के अंतिम सप्ताह में इसकी बैठक उत्तराखंड के नैनीताल जिले के रामनगर क्षेत्र में हुई। रामनगर तक पंतनगर हवाई क्षेत्र से विदेशी और देशी लुटेरे प्रतिनिधियों को पहुंचाने से पहले सड़क मार्ग पर पड़ने वाली दुकानों को बुलडोज़र से धवस्त कर दिया गया। इसी तरह के मामले आने वाले वक्त में और सामने आते जाएंगे।
आज दुनिया के जो हालात उसे इस मंच के भीतर अलग अलग देशों की टकराहटों, द्वन्दों तथा खुद देश के भीतर के आर्थिक आर्थिक राजनीतिक हालात से समझा जा सकता है।
भारत में मोदी सरकार ने एक ओर घोर पूंजीपरस्त नीतियों को सरपट भगाया है तो दूसरी तरफ हिंदू फासीवादी राजनीति के दम पर ध्रूवीकरण को तेजी से आगे बढ़ाया है। भारतीय समाज आज सबसे ज्यादा राजनीतिक तौर पर विभाजित है। मुस्लिमों को दोयम दर्जे की स्थिति में धकेला गया है। हिन्दू आबादी का ठीकठाक हिस्सा इस हिंदुत्व की राजनीति के साथ गोलबंद है।
एक ओर यह है तो दूसरी तरफ पाकिस्तान और चीन के शासकों के साथ अंतर्विरोध तीखे हुए हैं।
भारत से बाहर देखें तो दुनिया दो खेमे में बंटी हुई है एक ओर अमेरिका की अगुवाई में ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और कनाडा व जापान के साथ नाटो तो दूसरी तरफ रूस और चीन। अमेरिकी शासकों के अपने प्रभुत्व की मंशा के चलते दोनों खेमों में अंतर्विरोध तीखे हुए हैं। इसका नतीजा यूक्रेन में अमेरिका और रूस के बीच चल रहा युद्ध है। जिसमें दोनों ही आमने सामने नहीं मगर परोक्ष संघर्ष में है।
इससे इतर इन सभी देशों में मजदूर वर्ग और बाकी जनता से शासकों के अंतर्विरोध तीखे हुए हैं। फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन में इस वक़्त बड़ी हड़तालें और संघर्ष सामने हैं। शासक वर्ग जनता पर हमलावर है। सभी जगह दक्षिणपंथी या फासीवादी पार्टियां उभार पर हैं।
जी 20 की बैठक इसी घोर जनविरोधी आर्थिक नीति के साथ घोर जनवाद विरोधी दक्षिणपंथी या फासीवादी राजनीति को आगे बढ़ा रही है। एक ओर भारत में फासीवादी मोदी सरकार में व्यवहार में अघोषित निरंकुशता की स्थिति बना दी है तो दूसरी तरफ रूस में पुतिन अंधराष्ट्रवाद के दम पर विपक्ष और जन विरोध को ध्वस्त करते हुए निरंकुशता की स्थिति कायम कर चुके हैं।
अमेरिकी साम्राज्यवाद और इजरायली विस्तारवाद तथा ईरान पर थोपा युद्द और युद्धविराम
अमेरिकी साम्राज्यवाद और इजरायली विस्तारवाद तथा ईरान पर थोपा युद्द और युद्धविराम अंततः अमेरिकी साम्राज्यवादियों को फिलहाल पीछे हटना ...
-
जालियावाला बाग के शहीदों को याद करो ! धर्म की जहरीली राजनीति को ध्वस्त करो ! ब्रिटिश गुलामी से मुक्ति की आकांक्षा में अनगिनत...
-
भारत पाक सैन्य टकराव औ र युद्ध विराम 22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम में कथित आतंकी हमले में 28 लोग मारे गए। इसमें अधिकतर हिंद...
-
8 मार्च: अंतराष्ट्रीय महिला दिवस ज़िंदाबाद आज से लगभग 110 साल पहले, 1910 से 8 मार्च 'कामगार महिलाओं' के लिए बराबरी के अधिका...
-
काकोरी के शहीदों की स्मृति में अशफ़ाक़-बिस्मिल की राह चलो ! राम प्रसाद बिस्मिल, अशफ़ाक़ उल्ला खाँ...
-
Krantikari Lok Adhikar Sangathan support the Nation wide Bandh call from central trade unions for 28th February 2012. The bandh is against t...
-
मौकापरस्त गठबन्धन अर्थात महागठबंधन बनाम हिन्दू फासीवादी गठबंधन बिहार में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। तीन चरणों के चुनाव ...
-
जी 20 और भारत जी 20 की इस साल की अध्यक्षता भारतीय शासक कर रहे हैं। इस समूह में दुनिया भर में लूटखसोट मचाने और कई देशो...
-
समान नागरिक संहिता और इसका विरोध उत्तराखंड में भाजपा सरकार ने 27 जनवरी 2025 से समान नागरिक संहिता को लागू कर दिया है।...